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नमस्कार,दोस्तों मेरा नाम संजीव कुमार झा है।मै राजधानी दिल्ली में सपरिवार रहता हूं।मैं ने अपनी स्कूलिंग सर्वोदय विद्यालय से साल 2003 में पूरी की थी।उसके बाद मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन साल 2006 में की थी।शुरू से ही मुझे
इंफॉर्मेशन को पढ़ना, समझना और दूसरों के साथ शेयर करने का शौक था।

साल 2008 में मैंने,आई आई एम सी ,जामिया और YMCA
में पत्रकारिता का एंट्रेंस दिया था।मेरा नंबर YMCA में आया।और यहां से मैने 2008 में टीवी जर्नलिज्म का डिप्लोमा किया।मैं पुण्य प्रसून वाजपेयी की तरह एक नामी पत्रकार बनना चाहता था।पर मुझे कोर्स के वक़्त मुझे ये नही पता था कि हिंदुस्तान में पत्रकार बनने के लिए योग्यता के साथ सिफारिश और गॉड फादर की ज़रूरत होती है।

जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैं ने सभी टीवी चैनल्स के दफ्तरों में जाकर अपना रिज्यूम सबमिट किया।पर कहीं से इंटरव्यू का कोई कॉल नही आया।अपने एक दोस्त की सलाह पर मेरे पिताजी मुझे श्री एस एम खान जोकि उस समय भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो में उच्च पद पर तैनात थे,और राम मनो हर लोहिया हॉस्पिटल के पास सरकारी कोठी में रहते थे।उनके घर पर ले गए कई दिनों उनके घर और दफ्तर का चक्कर लगाने के बाद उन्होंने उस समय एक नए चैनल के संपादक जिसे आज आप इंडिया न्यूज के नाम से जानते है।श्री हरीश गुप्ता से बात करके एज अ जूनियर रिपोर्टर मुझे रखवा दिया।

मैंने यहां 9 महीने काम किया।और उसके बाद में न्यूज़ चैनल्स में होने वाली राजनीति का शिकार हो गया।मेरी उम्र उस समय 23 साल की होगी।एक दिन बहलाकर मुझसे रिजाइन लिखवा लिया गया।उसके बाद मेरी ज़िंदगी का रियल स्ट्रगल शुरू हुआ।ऐसा कोई  चैनल दिल्ली एनसीआर में नही होगा।जहां मैंने अपना रिज्यूम न दिया हो।पर क्योंकि मेरे पास कोई ठोस सिफारिश नहीं थी।इसलिए मैं मीडिया में असफल रहा।या यूं कहें कि मैं शायद बदनसीब था।

जर्नलिज्म में पढ़ाई के दौरान मेरा एक दोस्त था।जिसके जानकार मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस बियॉन्ड ड्रीम्स में काम करते थे।एक दिन उनसे फ़ोन पर बात की उन्होंने मुझे मुम्बई आने को कहा।मैं वहाँ पहुंचा।उस समय उस प्रोडक्शन हाउस का ज़ी tv पर एक सीरियल टेलीकास्ट हो रहा था।मोनिका मोगरे केस फाइल्स।उसके डायरेक्टर थे,सत्यम चतुर्वेदी,उन्होंने मुझे अस आ असिस्टेंट डायरेक्टर अपने  साथ रख लिया।

पर मेरा दुर्भाग्य मेरे साथ चल रही थी।सीरियल कुछ समय बाद बंद हो गई।उसके बाद मैं दिल्ली लौट आया।मैन एक बार फिर अपना रिज़्यूमे न्यूज़ चैनल्स में डाला कोई जवाब नही मिला।लास्ट में हारकर मैंने llb में एडमिशन लिया और 2012 में लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद से मैं डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहा हूँ।

ब्लॉगिंग में मैं साल 2018 दिसंबर से आया।शुरू के एक साल अपने दोस्तों की सलाह में मैंने आईना 18 पर अंग्रेज़ी ब्लॉगिंग की।उसमें भी मैं सफल नही रहा।19 अप्रैल से मैंने आईना 18 पर एक बार फिर एक उम्मीद के साथ हिंदी में ब्लॉगिंग स्टार्ट की है।एक नए उम्मीद के साथ, देखते है इस बार किस्मत किस करवट बैठती है।

Sanjeev Jha



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