शनिवार, 18 अप्रैल 2020

Upnayan Sanskar:उपनयन क्या होता है, और भारत मे हिन्दू क्यों पहनते है जनेऊ ?

हिन्दू रीती रिवाज में  janeu का एक विशेष स्थान है।वैसे  तो हिंदुओं में सभी वर्ग janeu पहनते है।
पर ब्राहमण, वैश्य और क्षत्रिय वर्ग में इसका एक अलग महत्व है। आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि Upnayan या Janeu क्या है।और भारतीय Hindu से धारण क्यों करते है।Upnayan क्यों किया जाता है।और किस Age में किया जाता है।और इसका क्या importance होता है।
और साथ ही जानेंगे कि साल 2020 में किस Date और Muhurat में Upnayan Sanskar शुभ रहेगा।


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उपनयन या जनेऊ क्या है

दोस्तों उपनयन, जनेऊ या यगोपवित का एक ही अर्थ होता है।यह एक वैदिक परंपरा है।जिसका पालम कई युगों से भारत के अलग अलग हिस्सों में वहां के रीति-रिवाज से किया जाता है।वैदिक मान्यताओं के मुताबिक एक व्यक्ति का दो बार जन्म होता है।एक बार माता के गर्भ से,और दूसरी बार जब वह ज्ञान ग्रहण करके अपनी योग्यता के अनुसार अपने और परिवार का भरण पोषण करने योग्य हो जाता है।प्राचीन काल मे जब एक बालक गुरुकुल में ज्ञान अर्जित करने जाता था।तो शरीर और मन की शुद्धि के लिए उसका यगोपवित या उपनयन किया जाता था।इसके बाद ही वह ज्ञान ग्रहण योग्य माना जाता था।उसी तरह आज भी हिंदूओं में विशेष अनुष्ठान एवं पूजा पाठ के बाद एक बालक का उसके तन एवं मन की शुद्धि के लिए पूरे रीति रिवाज के साथ उपनयन किया जाता है।

कैसे किया जाता है उपनयन

भारत के विभिन्न भागों में वहां के रीति रिवाज के मुताबिक कुल देवता के पूजा पाठ के साथ एक बालक का उपनयन किया जाता है।इस पूरी प्रक्रिया में एक गुरु का चयन किया जाता है।जो उपनयन किए जा रहे बालक के कान में गुरु मंत्र देते है।और उसके बाद यज्ञ और वेद मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।इस प्रक्रिया के बाद, एक धागे को मंत्र उच्चारण के बाद जल से पवित्र करके बालक को धारण कराया जाता है।इसी को जनेऊ कहते हैं।ऐसी मान्यता है कि नियम से जनेऊ धारण करने वाले व्यक्ति को बीमारी, भूत प्रेत एवं ऊपरी हवा भी नुकसान नहीं पहुंचा सकते।
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किस उम्र में किया जाता है उपनयन

गौतम गृह्य सूत्र के अनुसार उपनयन की कोई तय सीमा नही है।यानि, एक हिन्दू किसी भी उम्र में अपना उपनयन करा सकता है।पर भारत के अधिकांश हिस्सों में ब्राह्मणों में एक बालक का उपनयन 8 साल की उम्र में , क्षत्रियों में 11 साल की उम्र में वैश्यों में 12 साल की उम्र में उपनयन संस्कार को शुभ माना गया है।भारत के कई भागों में शादी के समय भी उपनयन किया जाता है।

उपनयन का महत्व

उपनयन संस्कार का हिंदुओं में विशेष महत्त्व है।और ऐसा माना जाता है कि इसके बाद एक बालक के शरीर एवं मन का पूर्ण विकास होता है।साथ ही जनेऊ उसे विधिपूर्वक धारण करने वाले व्यक्ति की तमाम बीमारियों और नेगेटिव एनर्जी से भी बचाव करते हैं।

साल 2020 में क्या है उपनयन के शुभ मुहूर्त

तारीख         दिन        नक्षत्र              शुभ मुहुर्त   
1.26 अप्रैल रविवार   बैसाख त्रितया    सुबह 5:45
                                                       से दोपहर
                                                        13:23
2.3 मई       रविवार   बैसाख दशमी     सुबह 05:39
                                                     से दोपहर   
                                                      12:08
3.4 मई       सोमवार।  बैसाख एकादशी  सुबह 06:13
                                                       से दोपहर   
                                                       15:04 
4.25 मई     रविवार    जेठ त्रितया        सुबह 07:54
                                                      से दोपहर
                                                      15:57
5.27 मई    बुधवार    जेठ पंचमी         सुबह 07:28
                                                      से दोपहर
                                                       15:49
Article references: wikipedia,google,youtube,astro age
Drafted by- sanjeev jha

1 टिप्पणी:

  1. दोस्तों,कृपया इस आर्टिकल के संदर्भ में आप क्या सोचते है,कमेंट करके हमें ज़रूर बताएं।

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